प्रतीक राधाकृष्णन: लक्ज़री कार, हेलिकॉप्टर और करोड़ों की पॉन्ज़ी स्कीम से बनी झूठी शान, बेंगलुरु में गिरफ्तार ठग की असली कहानी
6 जुलाई 2025 की सुबह, बेंगलुरु की चमचमाती सड़कों पर एक लक्ज़री कार दौड़ रही थी। कार में बैठा था एक शख्स—35 साल का प्रतीक राधाकृष्णन। महंगे सूट, स्टाइलिश घड़ी और दुनिया घूमने वाली कहानियों के पीछे उसकी जिंदगी किसी फिल्मी किरदार जैसी लग रही थी। हेलिकॉप्टर की सवारी, सुपरबाइक, 25 लाख रुपये की घड़ियाँ और पांच सितारा होटलों की ज़िंदगी—सब कुछ उसके पास था। लेकिन ये सारी चमक-दमक सिर्फ एक छलावा थी।
असलियत ये थी कि प्रतीक ने 65 करोड़ रुपये की पॉन्ज़ी स्कीम से लोगों की गाढ़ी कमाई लूटकर ये नकली साम्राज्य खड़ा किया था।
शान-ओ-शौकत से सलाखों तक
पुलिस ने उस दिन जब उसकी कार रोकी, तो धीरे-धीरे उसके ठाट-बाट की परतें उतरने लगीं। मुंबई पुलिस के पास जून 2025 में ही शिकायत आ चुकी थी कि उसकी कंपनी "TARS प्रोजेक्ट मैनेजमेंट" ने एक 62 वर्षीय शख्स से 5.24 करोड़ रुपये ठग लिए हैं।
कहानी नवंबर 2024 से शुरू होती है। एक निवेशक ने रिश्तेदार की सिफारिश पर 10 लाख रुपये लगाए और अगले महीने 90 हज़ार रुपये ब्याज पाकर खुश हो गया। विश्वास इतना बढ़ा कि उसने कुछ ही महीनों में 5 करोड़ से ज्यादा लगा दिए। लेकिन अचानक पैसों का आना बंद हो गया। जब उसने पैसे वापस मांगे तो प्रतीक ने नकली चेक और फर्जी ड्राफ्ट पकड़ाए और फिर गायब हो गया।
कई शहरों में फैला जाल
जांच में पता चला कि सिर्फ एक साल में मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई और केरल में करीब 30 निवेशक इस जाल में फंस चुके थे।
दरअसल, ये उसकी पुरानी आदत थी। 2022 में चेन्नई पुलिस ने उस पर 2.82 करोड़ की ठगी का केस दर्ज किया था। वहीं मुंबई में एक कारोबारी ने आरोप लगाया कि उसने 4.17 करोड़ रुपये कंपनी के शेयर दिलाने के नाम पर हड़प लिए।
नई पहचान: रोहन मेनन
2024 में उसने अपनी सबसे खतरनाक चाल चली। सेंट किट्स की नागरिकता लेकर उसने खुद को "रोहन मेनन" नाम से पेश करना शुरू कर दिया। इसी पहचान के सहारे वो अमीर और बुजुर्ग निवेशकों को निशाना बनाता।
पैसे ठगने के बाद वो उन्हें दोस्तों के अकाउंट से घुमाता, 1% कमीशन देता और फिर हवाला और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेश भेज देता।
कहानियों से बुनी ज़िंदगी
प्रतीक खुद को IIT मद्रास का BTech ग्रेजुएट और विदेश से MBA कर चुका बताता था। न्यूयॉर्क और दुबई की जॉब्स की कहानियाँ सुनाकर वो भरोसा जीतता। लेकिन सच्चाई ये थी कि उसकी पूरी ज़िंदगी महज़ झूठ पर टिकी थी।
हेलिकॉप्टर की उड़ानें, पाँच सितारा होटल, महंगी घड़ियाँ—सब कुछ लोगों की मेहनत की कमाई से खरीदी गई एक नकली दुनिया थी।