पाकिस्तान के टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ रवैये से FATF नाखुश, अभी जारी रखेगा निगरानी

 
पाकिस्तान के टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ रवैये से FATF नाखुश, अभी जारी रखेगा निगरानी

World: पाकिस्तान के लिए अब हालत और ख़राब होते जा रही हैं. देश में टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों के खिलाफ हो रही कार्रवाई से FATF यानी कि फाइनेंसियल एक्शन टास्क फाॅर्स अभी भी नाखुश है. जिसके वजह से उनकी मुसीबत कम नहीं होने वाली है और एफएटीएफ (FATF) की एशिया पैसिफिक ग्रुप उनपर अपनी निगरानी जारी रखेगी.

इससे पहले FATF ने पाकिस्तान को देश के फाइनेंसियस सिस्टम का उपयोग टेरर फंडिंग और उनसे जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने, साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग में भी लिप्त होने के कारण जून 2018 में ग्रे लिस्ट में डाल दिया था. तब से ही पाकिस्तान इस लिस्ट से निकलने के लिए जोर अजमाइश कर रहा है.

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बता दें कि एफएटीएफ की ग्लोबल टेरर फाइनेंसिंग वॉचडॉग ने साल के शुरुआत में पाकिस्तान राष्ट्र को जून तक ग्रे सूची में दर्ज कर लिया था.

गौरतलब है कि जांच-पड़ताल के दौरान भी FATF ने यही पाया था कि पाकिस्तान मजबूती से मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग जैसी समस्याओं को दूर करने या उससे लड़ने में बिलकुल असक्षम रहा है. इसके साथ ही जो 27 एक्शन प्लान मुल्क को दिए गए थे उन्हें भी पालन करवाने में फ्लॉप रहा है.

इससे अलग एशिया पैसिफिक ग्रुप ने पाकिस्तान को लेकर सेकेंड फॉलो-अप रिपोर्ट (FUR) भी बनाई है. यह रिपोर्ट आपसी मूल्याङ्कन पर आधारित है जो कि पाकिस्तान इनके बताए मापदंडों पर भी खरा नहीं उतरा है.

डॉन' के रिपोर्ट में दांवा, FATF की 7 शिफरिशों को पूर्ण कर चूका है देश

उधर पाकिस्तान के एक अख़बार 'डॉन' के रिपोर्ट में यह दंवा किया गया है कि देश FATF की 7 शिफरिशों को पूर्ण कर चूका है जबकि 24 अन्य का सही ढ़ंग से अनुपालन कर रहा है. वही अब राष्ट्र कुल 40 सिफारिशों में से 31 का अनुपालन सही ढ़ंग से कर रहा है. 

रिपोर्ट के अनुसार मूल्याङ्कन की अंतिम तारीख 1 अक्टूबर, 2020 थी

हालाँकि पाकिस्तान ने जो अपनी रिपोर्ट सौंपी थी उसके अनुसार मूल्यांकन करने की अंतिम तारीख 1 अक्टूबर, 2020 थी, लेकिन अभी भी राष्ट्रीय राजधानी इस्लामाबाद को और बढ़िया करना होगा तभी जाकर उनका मूल्याङ्कन बड़े स्तर पर हो पाएगा.

मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के मामले में और भी ज्यादा ताकत दिखाए पाकिस्तान: एपीजी

उधर एपीजी ने साफ किया है कि 'पाकिस्तान को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के मामले में और भी ज्यादा ताकत दिखाने की जरुरत है जिससे राष्ट्र की अपनी स्थिति मजबूत होगी तथा उसे लगातार एपीजी को इस संबंध में किये गये अपने कार्यों की प्रोग्रेस रिपोर्ट सौंपनी होगी. 

तीसरी रिपोर्ट का मूल्याङ्कन बाकी

अभी बता दें कि पाकिस्तान ने आखिरी बार फ़रवरी, 2021 में अपनी तीसरी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसका मूल्याङ्कन करना अभी बाकी है. पाकिस्तान का ग्रे सूची में जाना मतलब अब सीधे उन्हें अंतराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा आर्थिक मदद से वंचित रखा जाएगा.

आर्थिक स्थिति जिस देश की पहले से डगमगाई हुई है उससे अब अंतराष्ट्रीय स्तर पर सहायता की कम ही गुंजाईश रखनी होगी.

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