ISIS-K ने काबुल एयरपोर्ट हमले की ली ज़िम्मेदारी, जानें कौन है यह आतंकी संगठन? तालिबान से क्या है नाता?

 
ISIS-K ने काबुल एयरपोर्ट हमले की ली ज़िम्मेदारी, जानें कौन है यह आतंकी संगठन? तालिबान से क्या है नाता?

अफगानिस्तान (Afghanistan) की राजधानी काबुल (Kabul) में एयरपोर्ट के पास गुरुवार को हुए आत्मघाती डबल धमाकों की जिम्मेदारी आतंकी संगठन ISIS-K ने ली है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन धमाकों में 60 लोगों और कम से कम 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है, जबकि 150 लोग जख्मी हुए हैं. ISIS-K ने बताया है कि उनका हमलावर काबुल हवाई अड्डे के पास बारां कैंप के पास पहुंचने में कामयाब रहा था जहां अमेरिकी सैनिक और उनके सहयोगी बड़ी मात्रा में मौजूद थे वहां जाकर हमलावर में विस्फोट के जरिए खुद को उड़ा दिया.

क्या है ISIS-K?

ISIS-K का नाम पूर्वोत्तर ईरान, दक्षिणी तुर्कमेनिस्तान और उत्तरी अफगानिस्तान में स्थित एक पुरानी जगह के नाम पर रखा गया है. इसे पहली बार 2014 के आखिर में पूर्वी अफगानिस्तान में देखा गया था. यह बहुत ही जल्द अपनी क्रूरता के लिए जाना जाने लगा. इस्लामी उग्रवाद के कुछ विशेषज्ञ बताते हैं कि जब पाकिस्तान सुरक्षा बलों ने तालिबान के कुछ लोगों पिर कार्रवाई की थी तो वे अफगानिस्तान भाग गए और उन्होंने इसकी स्थापना की थी. अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने पहले सीएनएन को बताया था कि आईएसआईएस-के सदस्यता में "सीरिया के अनुभवी जिहादियों और अन्य विदेशी आतंकवादी लड़ाकों की एक छोटी संख्या" शामिल है. अमेरिका ने अफगानिस्तान में टॉप कार्यकर्ताओं में से 10 से 15 की पहचान की थी.

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तालिबान छोड़ने वाले लड़ाकों की भर्ती करता है ISIS-खोरासान

खोरासान गुट तालिबान छोड़ने वाले लड़ाकों की भर्ती करता है. तालिबान छोड़कर आए लड़ाकों को कमांडर बनाता है. उज्बेक, ताजिक, वीगर और चेचेन्या से युवाओं की भर्ती करता है. खोरासान गुट अफगानिस्तान में नया ठिकाना बनाने की कोशिश में है. ISIS-K गुट का अल कायदा से गठजोड़ है, इस गुट में अल कायदा से ट्रेनिंग ले चुके लड़ाके भी शामिल हैं. द गार्जियन की रिपोर्ट में कहा गया है कि ISIS-K का मानना है कि तालिबान ने अमेरिका के साथ बातचीत करने की इच्छा, उनकी स्पष्ट व्यावहारिकता और पर्याप्त कठोरता के साथ इस्लामी कानून को लागू करने में उनकी विफलता के कारण इस्लामी विश्वास को त्याग दिया है.

तालिबान से क्या रिश्ता?

ISIS-K और तालिबान के बीच कट्टर दुश्मनी का रिश्ता है. पिछले ही हफ्ते तालिबान ने ISIS-K के एक कमांडर, जिसे जेल में बंद रखा गया था, को काबुल में ढेर कर दिया है. इस समूह के बारे में कहा जाता है कि यह तालिबान की तरह कट्टरपंथी नहीं है. दोनों विद्रोही समूह अफगानिस्तान में इलाके को कब्जा करने के दौरान कई बार आपस में भिड़ चुके हैं. इस संगठन में जुड़े लोग आतंकी संगठन अलकायदा की विचारधारी रखते हैं. इसे सीरिया से संचालित किया जाता है. तालिबान को सबसे ज्यादा खतरा ISIS-K से ही है. IS-K तालिबान को खदेड़कर अफगानिस्तान पर अपना प्रभुत्व चाहता है. काबुल में धमाका कर वह तालिबान का डर भी खत्म करने का संदेश देना चाहता है, ताकि उसका प्रसार हो सके.

क्या है उनका टारगेट?

ISIS-K ने काबुल और अन्य शहरों में सरकार और विदेशी सैन्य ठिकानों के खिलाफ कई आत्मघाती बम विस्फोट किए हैं. विशेषज्ञों ने कहा है कि इनका उद्देश्य अधिक हिंसक और चरम उग्रवादी आंदोलन के रूप में अपनी साख स्थापित करना है. गांव के बुजुर्गों की फांसी से लेकर रेड क्रॉस कार्यकर्ताओं की हत्याओं और भीड़ पर आत्मघाती हमलों तक इसे कई हमलों के लिए दोषी ठहराया गया है. इसके हालिया लक्ष्यों में काबुल में एक सूफी मस्जिद, ईंधन टैंकर और शिया बस यात्री शामिल थे. अमेरिकी अधिकारियों का यह भी मानना ​​​​है कि मुख्य रूप से शिया हजारा अल्पसंख्यक के लिए लड़कियों के स्कूल पर किया गया हमला भी ISIS-K का काम था.

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