COVID से ठीक हो चुके लोगों को ओमिक्रॉन से कितना खतरा? जानिए

 

दुनिया के तमाम देशों में कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट लोगों के लिए गंभीर मुसीबतों का कारण बनता जा रहा है। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे पहले 9 नवंबर को कोरोना के इस घातक वैरिएंट के संक्रमण के बारे में पता चला था, तब से अबतक यह कई देशों को अपनी गिरफ्त में ले चुका है।

सिर्फ विश्व में नहीं बल्कि भारत में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। भारत के रूप में आ रहे हैं। सोमवार तक आए भारत के रिपोर्ट में 20 से अधिक मामले आ चुके हैं।

ओमिक्रॉन वैरिएंट का असर सिर्फ सारिक नहीं बल्कि मानसिक और आर्थिक भी हो रहा है। अमेरिका में एक कंपनी के 900 कर्मचारी को जॉब से निकाल दिया गया है। वजह कोरोनावायरस का आने वाला तीसरा लहर।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञ की माने तो किसी भी वायरस से संक्रमित होने के बाद शरीर में उससे अगली बार मुकाबले के लिए प्राकृतिक रूप से एंटीबॉडीज निर्मित हो जाती हैं। इसके बावजूद भी पहले कोरोना से संक्रमित हो चुके लोगों में भी ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित होने का जोखिम हो सकता है।

इस मसले पर यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन का भी एक अध्ययन आया है। जिसके अनुसार पूर्व में कोविड संक्रमण के बाद 10 महीने तक पुन: संक्रमण का जोखिम कम होता है।

साथ ही कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार वैक्सीनेश नगंभीर संक्रमण और कोरोना से होने वाली मौत के जोखिम से आपको बचा सकती है। हालांकि कई विशेषज्ञ बूस्टर डोज देने पर भी दे रहा है।

https://youtu.be/i5go3DfSuss

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