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Thursday, March 23, 2023
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Budget 2023-24: क्या है अमृतकाल जिसका वित्त मंत्री ने बजट में बार-बार किया प्रयोग?

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Budget 2023-24: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश कर रही हैं. उन्होंने कहा है कि यह Amrit Kaal का पहला बजट है. देश आजादी का अमृत महोत्सव मना चुका है. पीएम नरेंद्र मोदी अक्सर अमृतकाल की बात करते हैं. क्या आप जानते हैं कि इसका मतलब क्या होता है, आखिर वित्त मंत्री ने इसका जिक्र क्यों किया. आइए जानते हैं.

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह अमृतकाल का पहला बजट है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2014 से सरकार के प्रयासों ने सभी नागरिकों के जीवन की बेहतर गुणवत्ता और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित किया है. प्रति व्यक्ति आय दोगुनी से अधिक बढ़कर 1.97 लाख रुपये हो गई है. इन 9 सालों में, भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में बढ़ी है. 

क्या है Amrit Kaal?

अमृत काल वैदिक ज्योतिष से एक शब्द है. इसका मतलब है कि किसी भी नए काम की शुरुआत के लिए सही समय. यही वह समय है जब बड़ी से बड़ी उपलब्धि को हासिल किया जा सकता है. पीएम ने अपने भाषण में महत्वकांक्षी युवाओं की बात की. उन्होंने कहा कि युवा निरंतर अपनी जिंदगी में बेहतर पाने की कोशिश जारी रखते हैं. वे बेहतर सुविधाओं और संसाधनों के लिए जिंदगीभर इंतजार में नहीं बैठते. 

कब हुआ पहली बार इस्तमाल?

पिछले साल 15 अगस्त को नरेंद्र मोदी के भाषण में “अमृत काल” शब्द को पहली बार प्रमुखता से जगह मिली थी जब उन्होंने इसे अगले 25 सालों के लिए “नए भारत” की यात्रा के तौर पर बताया था.  प्रधानमंत्री मोदी ने इस 15 अगस्त को दिए अपने भाषण में 14 बार “अमृत काल” शब्द का प्रयोग किया.

सरकार के विरोध के वक्त हुआ सबसे ज्यादा प्रयोग

सरकार द्वारा इस शब्द का प्रयोग तब सबसे ज्यादा किया गया जब सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए गए. बता दें कि सबसे ज्यादा बार इस शब्द का प्रयोग इस साल जून में 19 बार किया गया जब नागरिक सरकार की अग्निवीर योजना का विरोध रहे थे.  इस योजना में कम समय के लिए आर्मी में भर्ती की जानी है जिससे कुछ रिटायरमेंट के फायदे नहीं मिलेंगे.  

वहीं नरेंद्र मोदी ने अप्रेल में अमृत काल का प्रयोग 14 बार किया जब भारत की महंगाई आठ साल में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई. अमृत काल शब्द का प्रयोग 15 बार मई में किया जब खुदरा महंगाई मंहगी होती खाने की वस्तुओं और महंगे ईंधन के कारण केंद्रीय बैंक की सुविधा के स्तर 6% से उपर चली गई.  न

रेंद्र मोदी इस महीने इस शब्द का प्रयोग इस साल और भी अधिक कर सकते हैं, क्योंकि विपक्षी दल बढ़ते दामों और बेरोजगारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज कर रहे हैं.  

ये भी पढ़ें: बजट के बाद कागज से लेकर हेलीकॉप्टर तक ये प्रोडेक्ट हो सकते हैं महंगे, जानें कारण

Punit Bhardwaj
Punit Bhardwaj
पुनीत भारद्वाज एक उभरते हुए पत्रकार हैं और The Vocal News Hindi में बतौर Sub-Editor कार्यरत हैं। उनकी रुचि बिजनेस,पॉलिटिक्स और खेल जैसे विषयों में हैं और इन विषयों पर वह काफी समय से लिखते आ रहे हैं। उन्होंने अपनी जर्नलिज्म की पढ़ाई AAFT से की है।
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