मुश्किलों भरे बचपन से ‘ट्रेजिडी किंग’ तक किया सफ़र, अलविदा दिलीप साहब!

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हिंदी सिनेमा के ट्रैजडी किंग के नाम से मशहूर और दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का लंबी बीमारी से जूझने के बाद आज निधन हो गया. वो 98 साल के थे. आज सुबह 7.30 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली. बतादे, दिलीप कुमार को सांस लेने में दिक्कत के चलते 29 जून को हिंदुजा अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

ट्विटर पर भी दी गई जानकारी

दिलीप कुमार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कुछ ही देर पहले ट्वीट किया गया है, जिसमें लिखा है, ‘भारी मन और गहरे दुख के साथ, मैं हमारे प्यारे दिलीप साहब के निधन की घोषणा करता हूं, कुछ मिनट पहले ही वो इस दुनिया को अलविदा कह गए. हम ईश्वर के हैं और उनके पास वापस लौटते हैं. — फैसल फारूकी’

मुश्किलों में गुजरा बचपन

दिलीप साहब ने पांच दशकों तक अपने शानदार अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज किया. पेशावर (अब पाकिस्तान में) में 11 दिसंबर, 1922 को जन्में दिलीप कुमार का असली नाम मुहम्मद यूसुफ खान है. उनका परिवार साल 1930 में मुंबई आकर बस गया. दिलीप कुमार के पिता फल बेचा करते थे. दिलीप कुमार बचपन से ही प्रतिभावान थे लेकिन परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं होने के कारण उनका बचपन मुश्किलों में गुजरा.

रिपोर्ट की मानें तो साल 1940 में पिता से मतभेद के बाद वह पुणे आ गए. यहां दिलीप कुमार की मुलाकात एक कैंटीन के मालिक ताज मोहम्मद से हुई, जिनकी मदद से उन्होंने आर्मी क्लब में सैंडविच स्टॉल लगाया. कैंटीन से हुई कमाई को लेकर दिलीप कुमार वापस मुंबई अपने पिता के पास आ गए और काम की तलाश शुरु कर दी.

‘ज्वार भट्टा’  से मिला बॉलीवुड में ब्रेक

मुंबई आने के बाद साल 1943 में चर्चगेट में दिलीप साहब की मुलाकात डॉ. मसानी से हुई, जिन्होंने उन्हें बॉम्बे टॉकीज में काम करने का ऑफर दिया. जहां दिलीप साहब की मुलाकात बॉम्बे टॉकीज की मालकिन देविका रानी से हुई. दिलीप कुमार ने फिल्म ‘ज्वार भट्टा’ से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की.

साल 1949 में आई फिल्म ‘अंदाज’ से दिलीप साहब को पहचान मिली. इस फिल्म में दिलीप कुमार के साथ राज कपूर थे। इस फिल्म के बाद ‘दीदार’ (1951) और ‘देवदास’ (1955) जैसी फिल्मों में दुखद भूमिकाओं के मशहूर होने की वजह से उन्हें ट्रेजिडी किंग कहा गया.

इनके आलावा दिलीप कुमार की कुछ फिल्में हैं- अंदाज (1949), आन (1952), दाग (1952), आजाद (1955), Mughal-e-Azam (1960), Gunga Jamuna (1961), Ram Aur Shyam (1967) जैसी फिल्मों में नज़र आए. 1976 में दिलीप कुमार ने काम से पांच साल का ब्रेक लिया. उसके बाद 1981 में उन्होंने क्रांति फिल्म से वापसी की. इसके बाद वो शक्ति (1982), मशाल (1984), करमा (1986), सौदागर (1991). उनकी आखिरी फिल्म किला (Qila) थी जो 1998 में रिलीज हुई.

इन फिल्मों से मिला फिल्मफेयर अवार्ड

साल 1983 में फिल्म ‘शक्ति’, 1968 में ‘राम और श्याम’, 1965 में ‘लीडर’, 1961 की ‘कोहिनूर’, 1958 की ‘नया दौर’, 1954 की ‘दाग’ के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार से नवाजा गया. दिलीप कुमार पर फिल्माया गया गाना ‘नैना जब लड़िहें तो भैया मन मा कसक होयबे करी’ आज भी लोगों को काफी पसंद है. 

पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिनेता के निधन पर ट्वीट कर कहा-‘दिलीप कुमार का जाना हमारी सांस्कृतिक दुनिया के लिए एक क्षति है. उनके परिवार, दोस्तों और असंख्य प्रशंसकों के प्रति संवेदना.’ पीएम ने लिखा कि – ‘दिलीप कुमार जी को सिनेमा की दुनिया में महान शख्स के के रूप में याद किए जाएगा. उन्हें अनोखी प्रतिभा का आशीर्वाद मिला था जिस वजह से कई पीढ़ियों के लोग उनके चाहने वाले थे. उनका जाना हमारी सांस्कृतिक दुनिया के लिए एक नुकसान है. उनके परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं.’ पीएम ने दिलीप कुमार की पत्नी शायरा बानो से फोन पर बात कर उन्हें ढांढ़स बंधाया.

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