धर्म किसी मठ महंत से ज़्यादा एक गरीब की कुटिया में सुरक्षित है

आनंद गिरि लैविश लाइफ़ जीने के शौक़ीन माने जाते हैं और एक गरीब अपने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने घर में अपने भगवान की पूजा करता है।

ये महंत बने लोग, अपने मठों में बैठकर ऐश्वर्य वाला जीवन जीते हैं, जनता और सरकारी दान के पैसे से वो सारी चीज़ें करते हैं जो एक आम आदमी की कल्पना से भी परे होता हैं।

बेशक़ सभी महंत ऐसे नहीं हैं, लेकिन जो भी हैं जितने भी हैं, सब उनके बारे में जानते हैं।

हम लोग मिशनरीज़ के द्वारा चलाए जाने वाले कन्वर्ज़न प्रोग्रैम्ज़ के बारे में सुनते हैं। वो लोग सच्ची सेवा करके, वंचितों और अभावग्रस्त लोगों को ही कन्वर्ट करने की कोशिश करते हैं। और इसके लिए वो जो प्रयास करते हैं उसका 1% प्रयास भी हम उन अभाव ग्रस्त लोगों की लाइफ़ को बेहतर बनाने के लिए नहीं करते। हम सिर्फ़ Plain Preaching करके अपने धर्म को बचाने के अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं।

हम अगर वास्तव में कन्वर्ज़न रोकना चाहते हैं तो हमें पहली तस्वीर में दिख रहे असली समर्पित हिंदुओं को बचाना होगा, उनका उत्थान करना होगा, बजाय ऐसे Luxury महंतों के, हमें धर्म को बचाने के लिए ऐसे व्यक्तियों और इनके उत्थान में लगी संस्थाओं को मज़बूत बनाना होगा…और इसके लिए ज़रूरी है, फ़र्ज़ी बाबाओं और महंतों को पब्लिक फ़ोरम पर बेनक़ाब किया जाए।

धर्म किसी मठ महंत से ज़्यादा एक गरीब की कुटिया में सुरक्षित है।

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