बच्चों में इन लक्षणों को ना करें नजरअंदाज, जानलेवा हो सकता है Dengue का बुखार

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नई दिल्लीः आमतौर पर अगस्‍त- सितंबर से मौसमी बुखार या वायरल फीवर (Viral Fever) के मामले तेजी से बढ़ने शुरू हो जाते हैं। फिर तेज़ी से ये फैलना शुरू हो जाता है और मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही मौतों के भी मामले सामने आने लगते हैं। उत्तर प्रदेश के कुछ शहर जैसे, फिरोजाबाद, मथुरा, प्रयागराज, मैनपुर, कानपुर, लखनऊ, सहित कई जिलों में हजारों की संख्‍या में वायरल फीवर के मरीज अस्‍पतालों में भर्ती हैं। वहीं मध्‍य प्रदेश, बिहार, हरियाना के कई शहरों में मौसमी बुखार (Seasonal Fever) के मरीज अस्‍पतालों में इलाज करा रहे हैं। सभी राज्‍यों में मिल रहे वायरल फीवर के मरीजों में सबसे ज्‍यादा संख्‍या बच्‍चों की सामने आ रही है। इतना ही नहीं इलाज में हो रही कमी के कारण रोजाना कई बच्‍चे अपना दम तोड़ रहे हैं। ऐसे में आपके लिए बहुत जरूरी है अपने बच्चों का खास ख्याल रखना।

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विशेषज्ञों का मानना है कि वायरल फीवर और डेंगू (Dengue) इस साल काफी खतरनाक हो रहे हैं वहीं बच्‍चे इस बार इन बीमारियों की चपेट में ज्यादा आ रहें हैं। बच्चे मन और शरीर दोनों से बहुत नाजुक होते है और जल्दी बीमार पड़ जाते है। डेंगू एक ऐसा बुखार है जो इस साल बच्‍चों को अपनी चपेट में ज्यादा ले रहा है। डेंगू का वायरस मच्छर से फैलता है। अगर डेंगू के बुखार का इलाज सहीं समय पर नहीं किया गया तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। डेंगू बुखार में ब्ल्ड में मौजूद प्लेटलेट्स बहुत तेजी से घटना शुरू हो जाते हैं। शुरूआती दौर में बच्चों में डेंगू बुखार के लक्षणों को पहचानना काफी मुश्किल होते है। लेकिन तीन से चार दिन बाद इसकी पहचान आसानी से की जा सकती है। बच्चों में डेंगू बुखार होने पर ये लक्षण पाए जाते हैं। इन लक्षणों के दिखते ही तुरंत डॉक्टर से अपने बच्चे की जांच करवाएं।

बदन दर्द

डेंगू बुखार में सिर, जोड़ों, बदन, आदि में दर्द होता है। इसलिए इस तरह की बच्चों में शिकायत होने पर इसे आम न समझे और तुरत जांच कराए।

त्वचा पर निशान

डेंगू बुखार में बच्चों की त्वचा पर हल्के निशान दिखाईदेने शुरू हो जाते हैं। इन निशानों को नजरअंदाज बिलकुल ना करें और डॉक्टर को दिखाए क्यूंकि ये भी डेंगू का लक्षण है।

कमजोरी महसूस होना

अक्सर देखा जाता है कि डेंगू के कारण बच्चों का बीपी काफी लो हो जाता है। जिसके चलते वह काफी कमजोर महसूस करतें है, यहां तक कि उनमें चलने-फिरने की भी हिम्मत नहीं होती है और बच्चे को चक्क‍र आने लगते हैं।

भूख न लगना

डेंगू बुखार हो जाने की वजह से बच्चों के मुंह का स्वाद काफी खराब हो जाता है। इसलिए उन्हें भूख नहीं लगती है। इसके अलावा लगातार प्लेटलेट्स का कम होनी शुरू हो जाती है। खाना न खाने की वजह से बच्चों में कमजोरी हो जाती है और चक्कर आने लगते है।

तेज बुखार

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इस बिमारी में बच्चे को लगातार तेज बुखार आता है और बुखार का कारण पता नहीं चल पा रहा हो। इसके साथ ही शरीर में कंपकपी और हाथ- पैरों, जोड़ों में दर्द होता है।ऐसे में बच्चे का ब्लड टेस्ट कराना बहुत जरूरी हो जाता है जिससे डेंगू की पहचान की जा सके।

इन उपायों से करें बच्चों का डेंगू से बचावः

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  • अपने घर और आसपास के इलाके को स्वच्छ रखें। इसके अलावा घर में मच्छर होने पर मच्छरदानी का प्रयोग करें।
  • बच्चों को डेंगूं बुखार से बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ दें।
  • घर के बाहर नीम की पत्तियां या नारियल की छाल को जलाकर मच्छरों को दूर भगा सकते हैं।
  • बच्चों को तेल और मसालेदार वाले खाने से परहेज करवाए , हल्का और पौष्टिक भोजन दें।
  • अपने आस- पास पानी को इखट्टा ना होने दे।
  • अगर घर में कूलर है तो उसके पानी को लगातार साफ करते रहे।
  • घर की टंकी पर यदि ढक्कन नहीं तो ढ़क्कन लगाए क्योंकि खुले पानी में डेंगू के मच्छर पंप सकते है।
  • बच्चों को पुरे कपड़े पहना कर रखें।

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