Chanakya Niti: इन 3 श्लोकों में छिपा है जीवन की हर समस्या का हल, रोजाना करें जाप

Chanakya Niti
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Chanakya Niti: चाणक्य नीति मानव जाति के लिए एक महत्वपूर्ण नीति ग्रंथ है. जिसमें मानव को सफल बनाने के लिए कई नियमों का उल्लेख किया गया है. इस नीति शास्त्र में कई दोहों का भी प्रयोग किया गया है, जिनके माध्यम से लोगों को आगे जीवन के लिए सचेत किया गया है.

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चाणक्य नीति में यूं तो कई प्रकार के श्लोकों का प्रयोग किया गया है. लेकिन यह तीन श्लोक चाणक्य नीति में सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं. यदि आप इन श्लोकों को अपने जीवन में उतार लेते हैं, तो आप अपने जीवन में हर समस्या से निजात पा सकते हैं.

Chanakya Niti

आइए जानते हैं चाणक्य नीति में बताए गए इन तीन श्लोकों के विषय में

अधीत्येदं यथाशास्त्रं नरो जानाति सत्तमः।
धर्मोपदेशं विख्यातं कार्याऽकार्य शुभाऽशुभम्।।

चाणक्य नीति के अनुसार जो व्यक्ति शास्त्र नियमों के अनुसार व्यवहार करता है उसे शुभ अशुभ स्थितियों का ज्ञान होता है. ऐसे व्यक्ति के पास सर्वोत्तम ज्ञान होता है. जिसके जरिए वह आसानी से सफलता प्राप्त कर सकते हैं.

प्दुष्टाभार्या शठं मित्रं भृत्यश्चोत्तरदायकः
ससर्पे च गृहे वासो मृत्युरेव नः संशयः

चाणक्य के अनुसार अपने जीवन में कभी भी दुष्ट पत्नी, झूठा मित्र, धूर्त सेवक और सर्प के साथ संबंध नहीं बनाने चाहिए. यह आपके जीवन के लिए बेहद घातक सिद्ध हो सकते हैं.

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आपदर्थे धनं रक्षेद्दारान् रक्षेध्दनैरपि
नआत्मानं सततं रक्षेद्दारैरपि धनैरपि

चाणक्य के अनुसार मनुष्य को अपने भविष्य के लिए धन का संचय अवश्य करना चाहिए. इसी के साथ ही मुसीबत के समय में पत्नी की सुरक्षा करनी चाहिए. लेकिन आत्मा की सुरक्षा धन और पत्नी से पहले करनी चाहिए.

यस्मिन् देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बान्धवः
न च विद्यागमऽप्यस्ति वासस्तत्र न कारयेत्

चाणक्य के श्लोक के अनुसार व्यक्ति को ऐसे देश में नहीं रहना चाहिए जहां सम्मान, रोजगार और अच्छे मित्र ना हो. व्यक्ति को ऐसे देश में भी नहीं रहना चाहिए जहां शिक्षा ना हो.