Lord shiva: भगवान शिव कैसे पहुंचे कैलाश से काशी? जानिए ये पौराणिक कहानी…

 
Lord shiva: भगवान शिव कैसे पहुंचे कैलाश से काशी? जानिए ये पौराणिक कहानी…

Lord shiva: सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को समर्पित है. आज के दिन मुख्य रूप से भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए उनकी आराधना की जाती है. ऐसे में आज के दिन यदि आप भी शंकर भगवान की भक्ति करते हैं, तो आपको भी ये जानने की जिज्ञासा अवश्य होगी. कि आखिर भगवान शिव जिनका निवास स्थान कैलाश है, तो फिर काशी को महादेव की स्थली क्यों कहा जाता है. आप ये सोच रहे हैं कि हम आपको आज काशी के बारे में क्यों बता रहे हैं.

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असल में, जब से ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग निकली है, तभी से वहां प्राचीन समय में शिव जी के मंदिर होने की बात कही जा रही है.यही कारण है कि ये जानना आवश्यक है कि आखिर क्यों कैलाश के अलावा काशी है शिव जी की निवास स्थली? काशी जिसे बनारस शहर के नाम भी जाना जाता है. जहां शिव जी के 12 जोतिर्लिंग में से एक स्थापित है. जिस कारण इस स्थान का महत्व और अधिक बढ़ जाता है. तो चलिए जानते हैं…

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तो इसलिए कैलाश से काशी पहुुंचे शिव जी और पार्वती….

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार देवी पार्वती ने भगवान शिव से कहा कि सभी देवी देवताओं के अपने घर हैं, हमारे क्यों नहीं है? जिसके बाद ही शिव जी ने काशी को अपने निवास स्थल के तौर पर चुना. जिस पर शिव जी के भक्त निकुम्भ ने काशी को इंसानों से रहित कर दिया. जिस पर काशी के राजा दिवोदास को काफी दुख हुआ. और उन्होंने ब्रह्मा जी की तपस्या शुरू कर दी. ऐसे में जब ब्रह्मा जी ने राजा को दर्शन दिए, तब राजा ने ब्रह्मा जी से कहा कि धरती तो इंसानों के रहने के

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लिए है. जिस पर ब्रह्मा जी ने भगवान शिव को काशी से जाने को कह दिया. हालांकि काशी से जाने के बाद भी शिव जी काशी से अपना मोह त्याग नहीं सके. और जब विष्णु जी को ये बात पता लगी. तब उन्होंने राजा दिवोदास को तपोवन में जाने की आज्ञा दे दी. और पुनं शिव जी काशी में आकर रहने लगे. इसके अलावा मान्यता ये भी है कि एक बार अपने एक भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी ने उसे दर्शन दिए. और कहा कि गंगा के किनारे सुबह तुम्हें दो शिवलिंगों के दर्शन होंगे. जिन्हें तुम्हें वहां स्थापित कराना होगा.

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आज वहीं शिवलिंग काशी में मौजूद हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काशी को ही सृष्टि की रचना का स्थल कहा गया है. कहते हैं इसी स्थान पर बैठकर विष्णु जी ने शंकर जी की उपासना की थी. तभी शिव जी ने दर्शन देकर भगवान विष्णु को सृष्टि के पालन के नियम समझाए थे. तभी से काशी शिव जी की स्थली के तौर पर जानी जाती है. जहां भगवान शिव विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग के तौर पर देवी पार्वती के साथ विराजमान हैं. तभी काशी को शिव जी की नगरी कहा जाता है.

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