Solar eclipse: वैज्ञानिक नजरिये से समझें, क्‍यों लगता है सूर्यग्रहण? क्या है सूर्य ग्रहण?

सूर्य ग्रहण
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सूर्य ग्रहण लगने के वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों ही कारण हैं। हालांकि विज्ञान के अनुसार सूर्य ग्रहण लगना भी एक फेस्टिवल की तरह ही है क्योंकि उससे उन्हें ब्रह्मांड के बारे में और भी ज्यादा जानने का मौका मिलता है।

सूर्य ग्रहण कब कहां और कैसे लगता है? इस सवाल पर धर्म और विज्ञान की अलग-अलग राय है।

जहां धार्मिक मान्यताओं अनुसार ग्रहण राहू या केतु के कारण लगता है। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के समय हमारे देवता परेशानी में होते हैं और राहू इस दौरान ब्रह्मांड पर अपना पूरा जोर लगा रहा होता है। इसलिए धार्मिक दृष्टि से ग्रहण को देखना अच्छा नहीं माना गया है।

वहीं वैज्ञानिक के नजरिए से यह एक खगोलीय घटना से ज्यादा कुछ नहीं है। ग्रहण से जुड़ी कई गतिविधियों को साइंस सिर्फ एक भ्रामक अफवाह मानता है। जैसे ग्रहण के समय खाना नहीं खाना चाहिए। और गर्भवती महिलाओं या किसी बीमारी से जूझ रहे रोगियों को ज्यादा सतर्क रहने के लिए कहा जाता है। वगैरा-वगैरा

विज्ञान के नजरिए से कैसे लगता है सूर्य ग्रहण?

*जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है तो सूर्य की चमकती सतह चंद्रमा के कारण दिखाई नहीं पड़ती है। साथ ही चंद्रमा की वजह से जब सूर्य छिपने लगता है तो इस स्थिति को भी सूर्य ग्रहण कहते हैं।

*जब सूर्य का एक भाग छिप जाता है तो उसे आंशिक सूर्यग्रहण और जब सूर्य कुछ देर के लिए पूरी तरह से चंद्रमा के पीछे छिप जाता है तो उसे पूर्ण सूर्यग्रहण कहते हैं।

*पूर्ण सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या को ही होता है।

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