प्रवासी मजदूरो का कश्मीर से पलायन, जवानो ने कहा माहौल खराब है

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पिछले तीन सप्ताह से कश्मीर में हालात गैर कश्मीरीयों के लिए बेहद नाजुक बने हुए है। आतंकवादियों ने बीते 5 अक्टूबर को कश्मीर के लाल बाजार इलाके में गोलगप्पे बेचने वाले विरेंद्र पासवान नामक व्यक्ति की हत्या कर दी थी। कश्मीर में हाल ही में हुई प्रवासियों की हत्या यह बताती है कि आतंकवादी वहाबी मानसिकता के शिकार है।

गैर मुस्लिमों का कश्मीर में रहना एक तरह से मौत के मुँह में रहने जैसा हो गया है। आये दिन वहा जिहादी आम भारतीय को चुन चुन कर मार रहे है। घृणा इस प्रकार की है की लोगों के नाम/धर्म पूछ कर उनके आयडेंटिटी कार्ड देख कर उनको मौत के घाट उतारा जा रहा है। ठीक इसी तरह कर गृह-आतंकवाद सन 1990 के आस-पास फैला था।

कट्टरपंथियों ने कश्मीरी पंडितो को मस्जिदों से नारे लगा कर भगाया था, कश्मीर को पाकिस्तान बनाने के नारे लगा करते थे। आज ऐसा पिछले दो सालो से तो नही है परंतु गैर मुस्लिमों का कश्मीर रहना आज भी मुश्किल है। हर पल अपनी जान हथेली पर लेकर चलना पड़ता है।

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एक अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार की रात को पटना पहुँची जम्मू तवी- राजेंद्र नगर अर्चना एक्सप्रेस जैसे ही पटना जंक्शन पहुँची तो उसमें सवार यात्री अपना सामान लेकर उतरने लगे। इनमें से कई यात्री कश्मीर के कुलगाम में मजदूरी किया करते थे। लेकिन पिछले दिनो कश्मीर घाटी में हुई टार्गेट किलिंग के भय से वे लोग अपने-अपने राज्य को वापस लौट आए।

इन लोगों के अनुसार कश्मीर में हालात होने के बाद वहा के स्थानीय लोगों ने उन्हें वापस धर लौटने की सलाह दी, साथ ही वहा तैनात भारतीय सेना के बहादुर जवानो ने भी प्रवासियों की सुरक्षा के लिए उनको घर जाने की सलाह दी। जिसके बाद प्रवासी मज़दूर अपने अपने घर लौटने पर विवश हो गए और अंततः सब अपने अपने थे लौट गए।

वापस लौटने वाले मज़दूर बेहद डरे हुए है उन्होंने साफ़ कह दिया कि वह किसी भी क़ीमत पर वापस कश्मीर नही जाएँगे। अपने परिवार के साथ लौटने वाले शख़्स ने कहा की वह क़रीब 11 सालो से कश्मीर में रह रहा है।उन्हें आज तक कोई दिक़्क़त नही हुई। लेकिन पिछले कई दिनो से हो रही टार्गेट किलिंग ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया है।

उन्होंने यह भी कहा की कश्मीर की मस्जिदों से वापस जाने का कोई फ़रमान तो नही आया लेकिन घटना को देखते हुए कोई जोखिम नही उठाना चाहते थे। पिछले 15 दिनो में बिहार के करीब 4 लोगों की आतंकवादियों ने बर्बरता पूर्वक हत्या कर दी। इन हत्याओं के बाद से ही लोगों का पलायन शुरू हो गया था।

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