Anant Ambani Zoo: वंतारा पर अंतरराष्ट्रीय आलोचना, जानवरों की सोर्सिंग और मीडिया दबाव पर सवाल

Anant Ambani Zoo: जिसे वंतारा (Vantara) के नाम से भी जाना जाता है, को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2025 की शुरुआत में उद्घाटन किया था। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें वे शेर और सफेद बाघ जैसे जानवरों को कांच के पार से प्यार से छूते दिख रहे हैं।
उन्होंने इस पोस्ट में लिखा
"वंतारा जैसा प्रयास वास्तव में सराहनीय है — यह हमारी सदियों पुरानी परंपरा का प्रतीक है, जिसमें हम धरती पर रहने वाले प्राणियों की रक्षा करते हैं।"
लेकिन इस वीडियो और समारोह के कुछ ही दिन बाद, वंतारा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जाने लगी।
दक्षिण अफ्रीका से उठा सवाल
6 मार्च को, Wildlife Animal Protection Forum of South Africa — जो कि 30 संगठनों का गठबंधन है — ने वहां के पर्यावरण मंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि वंतारा को भेजे गए जंगली जानवरों की जांच की जाए।
पत्र में यह भी पूछा गया कि क्या गुजरात का गर्म और शुष्क मौसम उन जानवरों के लिए उपयुक्त है, जिन्हें अफ्रीका जैसे ठंडे और नम क्षेत्रों से लाया गया है।
भारत की कुछ वेबसाइट्स जैसे Northeast Now और Down to Earth ने इस खबर को प्रकाशित किया, लेकिन बाद में इन्हें ईमेल और कानूनी नोटिस भेजे गए और रिपोर्ट हटाने के लिए कहा गया।
Down to Earth ने पुष्टि की कि उसे ₹1,000 करोड़ का मानहानि नोटिस मिला है, जिसे अनंत अंबानी के प्रतिनिधियों की ओर से भेजा गया।
विदेशी मीडिया में भी उठा मामला
भारतीय मीडिया भले ही चुप हो गई हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने वंतारा की गंभीरता से जांच की।
जर्मनी के अखबार Süddeutsche Zeitung (SZ) ने रिपोर्ट प्रकाशित की जिसका शीर्षक था: "The Billionaire and His 181 Lions"
श्रीलंका से प्रकाशित Himal Southasian पत्रिका ने 2023 में ही वंतारा पर एक रिपोर्ट की थी:
"The Costs of Reliance’s Wildlife Ambitions"
इस रिपोर्ट में बताया गया कि वंतारा में 4,700 से अधिक जानवर हैं, जिनमें से कई स्वस्थ हैं और उन्हें बचाने की कोई आवश्यकता नहीं थी।
एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने सवाल उठाया कि असम जैसे राज्यों से स्वस्थ हाथियों को 3,000 किलोमीटर दूर जामनगर क्यों भेजा जा रहा है?
भारत में मीडिया दबाव और सेंसरशिप?
कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, वंतारा से जुड़ी खबरों को हटाने के लिए कानूनी दबाव बनाया गया।
यह सवाल खड़ा करता है:
क्या Anant Ambani Zoo से जुड़ी आलोचनाओं को दबाने के लिए मीडिया पर दबाव डाला जा रहा है?
सरकार और कॉरपोरेट की छवि नियंत्रण नीति
यह घटना एक बड़ी प्रवृत्ति को दिखाती है — सरकार और कॉरपोरेट दोनों ही अब इमेज कंट्रोल को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं।
महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में ₹10 करोड़ की लागत से AI आधारित मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर शुरू करने की योजना बनाई है।
केंद्र सरकार ने भी Press Information Bureau (PIB) को फैक्ट-चेकिंग एजेंसी बनाने की कोशिश की थी, लेकिन भारी आलोचना के बाद उसे पीछे हटना पड़ा।
वैश्विक रैंकिंग को लेकर संवेदनशीलता
The Plank की एक रिपोर्ट “Inside India’s Battle to Control the Democracy Narrative” में बताया गया कि मोदी सरकार ने 2014 से लेकर अब तक वैश्विक सूचकांकों में भारत की रैंकिंग सुधारने के लिए आक्रामक प्रयास किए।
पूर्व आर्थिक सलाहकार संजय सान्याल की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि कम लोकतांत्रिक स्कोर = ज्यादा उधारी जोखिम = अधिक ब्याज दरें।
सरकार ने Ease of Doing Business, Democracy Index और Governance Indicators जैसे रैंकिंग सिस्टम को बेहतर समझकर उसमें सुधार के रास्ते खोजे।
निष्कर्ष: संरक्षण या छवि निर्माण?
Anant Ambani Zoo (Vantara) को लेकर कई सवाल उठते हैं:
क्या यह वास्तव में वन्यजीवों की भलाई के लिए है?
क्या जानवरों की सोर्सिंग पारदर्शी और नैतिक है?
क्या इस पूरे प्रोजेक्ट का उद्देश्य जनता और वैश्विक संस्थाओं की नजरों में सकारात्मक छवि बनाना है?
जब तक इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिलते, वंतारा पर बहस जारी रहेगी।