Vantara Private Zoo: अनंत अंबानी के वन्यजीव संरक्षण पर उठे सवाल

अनंत अंबानी द्वारा संचालित Vantara Private Zoo हाल ही में विवादों में आ गया है। जर्मन समाचार पत्र Süddeutsche Zeitung (SZ) ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि वंतारा में मौजूद कई जानवरों को अवैध रूप से जंगलों से पकड़ा गया और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के जरिए भारत लाया गया। हालांकि, वंतारा ने इन आरोपों को "निराधार" और "भ्रामक" बताते हुए कहा है कि सभी जानवर CITES अनुमोदित परमिट के तहत कानूनी रूप से लाए गए हैं।
Vantara Private Zoo क्या है?
Vantara, जिसका अर्थ "जंगल का तारा" है, गुजरात के जामनगर में स्थित 5.4 वर्ग मील में फैला हुआ एक निजी वन्यजीव बचाव केंद्र है। इसे अनंत अंबानी ने 2019 में स्थापित किया था और यह Greens Zoological Rescue & Rehabilitation Center और Radhe Krishna Temple Elephant Welfare Trust द्वारा संचालित होता है।
यह सार्वजनिक चिड़ियाघर नहीं है और अभी तक इसे आम जनता के लिए खोला नहीं गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, असम के काजीरंगा क्षेत्र में एक दूसरा वंतारा केंद्र भी विकसित किया जा रहा है।
Vantara पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
क्या वन्यजीव व्यापार को बढ़ावा दे रहा वंतारा?
जर्मन रिपोर्ट के मुताबिक, वंतारा ने पिछले एक साल में 39,000 से अधिक जानवरों का आयात किया।
जानवरों को 32 देशों और 53 निर्यातकों से मंगवाया गया।
इनमें लुप्तप्राय प्रजातियाँ भी शामिल हैं, जैसे कि चिंपांज़ी, ओरंगुटान, माउंटेन गोरिल्ला और दुर्लभ प्राइमेट्स।
ये जानवर वन्यजीव तस्करी के हॉटस्पॉट देशों जैसे वेनेजुएला, कांगो और इंडोनेशिया से आए।
Vantara के आपूर्तिकर्ताओं पर शक
रिपोर्ट में कहा गया कि वंतारा के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता में से एक UAE स्थित Kangaroo Animals Shelter Center है, जो केवल वंतारा को ही जानवर सप्लाई करता है।
कुछ प्रमुख तथ्य
11,729 जानवर UAE से आए, जिनमें 41 चिंपांज़ी, 14 ओरंगुटान और एक दुर्लभ माउंटेन गोरिल्ला शामिल हैं।
6,106 जानवर वेनेजुएला से आए, जिनमें 142 जाइंट एंटईटर और 101 जाइंट ओटर हैं।
1,770 जानवर कांगो से आए, जिनमें 100 दुर्लभ हैमलिन के बंदर भी शामिल हैं।
Vantara का बचाव: "आरोप बेबुनियाद हैं"
वंतारा ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि:
सभी जानवर कानूनी रूप से लाए गए हैं और उनके पास CITES परमिट हैं।
वंतारा केवल कैप्टिव-ब्रीड (पालतू रूप से पैदा किए गए) या बचाए गए जानवरों को स्वीकार करता है।
अवैध वन्यजीव व्यापार के खिलाफ काम करता है और सभी भारतीय और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करता है।
जर्मन रिपोर्ट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
वंतारा ने सवाल उठाया कि
"CITES परमिट पर संदेह करना उन देशों और अंतरराष्ट्रीय निकायों पर संदेह करने के बराबर है, जिन्होंने ये परमिट जारी किए हैं।"
क्या वंतारा का संरक्षण मॉडल अलग है?
जहां एक ओर आलोचकों का मानना है कि वंतारा की पारदर्शिता पर सवाल हैं, वहीं कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह वन्यजीव व्यापारियों से जानवरों को बचाने का प्रयास भी हो सकता है।
"बाय-आउट" मॉडल के तहत वंतारा जानवरों को तस्करों से खरीदकर बचाने का प्रयास कर सकता है।
यह मॉडल पहले पपी मिल्स, फर फार्म्स और डांसिंग बियर ट्रेड में सफल रहा है।
हालांकि, इसका दुरुपयोग भी संभव है, जिससे वन्यजीव व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है।
निष्कर्ष: वंतारा को पारदर्शिता दिखानी होगी
Vantara Private Zoo भारत का सबसे बड़ा निजी संरक्षण प्रोजेक्ट है, लेकिन इसकी जानवरों की खरीद और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
यदि वंतारा को वैश्विक समर्थन चाहिए, तो उसे
अपनी पशु अधिग्रहण प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी होगी।
अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संगठनों से जुड़कर नैतिक मानकों का पालन करना होगा।
स्वतंत्र ऑडिट की अनुमति देनी होगी, जिससे इसकी वैधता साबित हो सके।
जब तक ये सवाल अनुत्तरित हैं, तब तक वंतारा को लेकर संदेह और विवाद जारी रहेंगे।