CSK: 2018 में जब यह टीम चुनी गयी थी तो Dad’s Army बोल कर मज़ाक़ उड़ाया गया था

MS.Dhoni
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अरुणोदय. द वोकल न्यूज़ के दोस्त हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ इलाहाबाद के पुरा माने पुराने छात्र हैं. रहवासी अयोध्या से सटे गोण्डा के हैं. अभी UPPSC की तैयारी कर रहे हैं. और खेल और सिनेमा में गंभीर रुचि है. अरुणोदय ने IPL2021 में CSK के चैंपियन बनने पर एमएस धोनी के बारे में कुछ लिखा है, पढ़िए.

किसी चीज़ को उसके वास्तविक स्वरूप में स्वीकार करना एक सद्गुण है। दरअसल,स्वीकार्यता जीवन की एक कला है।

धोनी को एक कप्तान के रूप में पसन्द करने कई वजह हैं,उनको प्री/पोस्ट मैच प्रेज़ेन्टेशन में सुनना उनमें से एक है।उनको सुना जाना चाहिये।

ट्रॉफी कलेक्ट करने पहुंचे धोनी ने चेन्नई सुपर किंग्स के बारे में बात करने से पहले कोलकाता नाईट राइडर्स को जीत का असली हक़दार बताया और कहा कि अगर आप आंकड़ों पर ग़ौर करेंगे तो पाएंगे कि हम वह टीम हैं जो लगातार आईपीएल फाइनल हारे हैं।

यह ऐसी सच्चाई है जिसपर परदा नहीं डाला जा सकता लेकिन हमारे आसपास ऐसे ही लोगों का जमावड़ा है जिनमें स्वीकार्यता का भाव लगभग नष्ट हो चुका है। धोनी को सब के सामने इसे सहर्ष स्वीकार करते देख अच्छा लगता है।

“दामन को छोड़ती ही नहीं लखनऊ की ख़ाक,
मिटना है आरज़ू, इसी उजड़े दयार में”

असल पंक्तियों में लखनऊ है लेकिन यही बात धोनी के लिए चेन्नई के साथ है। 2020 का सीज़न लगभग आख़िरी पायदान पर ख़त्म करने पर धोनी ने कहा था इस साल हम अपनी पूरी क्षमता से नहीं खेले और देखिए उसी टीम के साथ 2021 की ट्रॉफी जीत कर साबित भी कर दिया कि कप्तानी अब भी उनमें बाक़ी है क्योंकि इस टीम में कोई विशेषज्ञ स्पिनर नहीं खेल रहा था।

इमरान ताहिर,मिचेल सैंटनर और घरेलू टूर्नामेंट में अपना जौहर दिखा चुके साईं किशोर को एक भी मौका इस सीज़न में नहीं मिला जबकि कोलकाता 3 स्पिनर के साथ खेल रही थी।

अपने तुरुप के इक्के ड्वेन ब्रावो को उनकी फ़िटनेस ध्यान में रखते हुए इस्तेमाल किया।दीपक चाहर और मोईन अली ने आईपीएल के दूसरे चरण में कोई ख़ास योगदान नहीं दिया फिर भी टीम का हिस्सा बने रहे और मोईन ने फाइनल में बढ़िया पारी खेली।एक कप्तान के रूप में धोनी का विश्वास काफ़ी बड़ा है तभी तो उन्होंने पिछले साल कहा था कि “We’ll come back stronger, that’s what we are known for.”

2018 में जब यह टीम चुनी गयी थी तो Dad’s Army बोल कर मज़ाक़ उड़ाया गया था कि T-20 युवा जोश का खेल है लेकिन 4 सालों में 2 ट्रॉफी जीत कर यह साबित हो चुका है अनुभव का धरातल बहुत व्यापक होता है।

फाइनल जीतने के बाद धोनी ने कहा कि,”पूरी टीम का शुक्रिया,उनके बिना मैं ट्रॉफी नहीं जीत सकता”
ऋतुराज और फ़ाफ़ के बिना इस टीम का मध्य क्रम एक्सपोज़ हो सकता था। हेज़लवुड की सधी हुई गेंदबाज़ी और शार्दूल के चामत्कारिक प्रदर्शनों के अभाव में यह गेंदबाज़ी क्रम दोयम दर्ज़े का साबित हो सकता था।

रॉबिन उथप्पा जिन्हें राजस्थान से ट्रेड किया गया था और उनका आख़िरी सीज़न प्रदर्शन एकदम लचर था उन्होंने दोनों प्लेऑफ मुक़ाबलों में उपयोगी पारियां खेलीं।धोनी का बल्ला इस सीज़न पूरी तरह से ख़ामोश ही रहा और उन्होंने हैदराबाद से मिली हार के बाद उसे भी स्वीकार किया।

यह कहते हुए मैं कभी नहीं झिझक सकता कि यह धोनी की टीम है।मैच शुरू होने से पहले जहां चेन्नई के खिलाड़ी बिना किसी दबाव के फ़ुटबॉल खेलते हुए देखे जा सकते थे जबकि कोलकाता के खिलाड़ी नेट प्रैक्टिस में व्यस्त थे।मनोभाव खेल और जीवन के बेहद महत्त्वपूर्ण पहलू हैं जहाँ पर धोनी की टीम ने मैच शुरू होने से पहले बाज़ी मार ली थी।

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