Remittances to India: भारत में बढ़ा प्रवासी धन, अब खाड़ी देशों से नहीं, अमेरिका और यूरोप से आता है ज़्यादा पैसा

 
Remittances to India: भारत में बढ़ा प्रवासी धन, अब खाड़ी देशों से नहीं, अमेरिका और यूरोप से आता है ज़्यादा पैसा

Remittances to India यानी विदेशों में काम कर रहे भारतीयों द्वारा अपने घर भेजे जाने वाले पैसे, 2023-24 में 118.7 अरब डॉलर तक पहुंच गए। यह रकम 2010-11 में मिले 55.6 अरब डॉलर से लगभग दोगुना है।

यह धनराशि भारत के वस्तु व्यापार घाटे को कम करने में मदद करती है और वैश्विक आर्थिक झटकों से देश की आर्थिक सुरक्षा भी करती है।

अब ज़्यादा पैसा अमेरिका और यूरोप से आ रहा है

RBI की मार्च 2025 बुलेटिन के अनुसार, अब भारत को सबसे ज़्यादा रेमिटेंस अमेरिका, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जैसे विकसित देशों से मिल रहा है। पहली बार इन देशों से मिलने वाली रकम ने खाड़ी देशों (Gulf countries) से आने वाले धन को पीछे छोड़ दिया है।

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अमेरिका से रेमिटेंस 2020-21 में 23.4% से बढ़कर 2023-24 में 27.7% हो गया

यूके से हिस्सा 6.8% से बढ़कर 10.8%

UAE अभी भी दूसरे स्थान पर है – 19.2% के साथ

इसका मतलब है कि अब ज़्यादा प्रशिक्षित और कुशल भारतीय लोग विकसित देशों में जाकर नौकरी कर रहे हैं।

किन राज्यों को मिल रहा है सबसे ज़्यादा रेमिटेंस?

किन राज्यों को मिल रहा है सबसे ज़्यादा रेमिटेंस?

महाराष्ट्र अभी भी सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य है, लेकिन इसका हिस्सा 35.2% से घटकर 20.5% हो गया है

केरल का हिस्सा लगभग दोगुना होकर 19.7% हो गया

तमिलनाडु (10.4%), तेलंगाना (8.1%), और कर्नाटक (7.7%) का हिस्सा भी बढ़ा है

इन राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र और पेशेवर विदेश जाते हैं और वहीं नौकरी भी पा जाते हैं।

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डिजिटल पेमेंट्स ने ट्रांसफर आसान किया, लेकिन खर्च अभी भी ज़्यादा

डिजिटलीकरण (digitalisation) ने रेमिटेंस भेजना आसान और तेज़ बना दिया है, लेकिन खर्च अभी भी SDG लक्ष्य 3% से ऊपर है।

$200 भेजने की औसत लागत अभी भी 4.9% है

बैंक ज़्यादा शुल्क लेते हैं, जबकि फिनटेक कंपनियां सस्ते विकल्प देती हैं

हालांकि डिजिटल तरीकों में साइबर सुरक्षा, नियमों की जटिलता और कम फाइनेंशियल लिटरेसी जैसे जोखिम भी हैं।

क्या हैं आने वाले खतरें?

अमेरिका या यूके में मंदी आने पर भारतीयों की नौकरियों पर असर पड़ेगा

तेल की कीमतों में गिरावट या खाड़ी देशों में आर्थिक सुधार से वहां से आने वाला रेमिटेंस घट सकता है

नए नियम और तकनीकी बदलाव भी प्रवासी भारतीयों को प्रभावित कर सकते हैं

भारत को क्या कदम उठाने चाहिए?

भारत को रेमिटेंस बढ़ाने और बनाए रखने के लिए एक सशक्त नीति अपनानी होगी:

स्किल डेवेलपमेंट और ग्लोबल जॉब मार्केट के लिए युवाओं को तैयार करना
डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को और मज़बूत करना
फिनटेक कंपनियों के साथ साझेदारी बढ़ाना
बिलेट्रल समझौते कर के भारतीयों की विदेशों में नौकरी की संभावनाएं बढ़ाना
केवल अमेरिका और खाड़ी देशों पर निर्भर रहने की बजाय नए देशों में मौके तलाशना

रेमिटेंस बना भारत की आर्थिक ताकत

Remittances to India न केवल भारत के व्यापार घाटे को संभालते हैं, बल्कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं में स्थिरता भी लाते हैं।
अब समय है कि सरकार इसे और बेहतर बनाने के लिए लंबी रणनीति अपनाए, जिससे आने वाले वर्षों में भी भारत इस क्षेत्र में दुनिया में नंबर 1 बना रहे।

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