Lord vishnu blessings: क्यों 4 महीनों के लिए सो जाते हैं भगवान विष्णु? पीछे छिपा है ये कारण…

Lord vishnu blessings
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Lord vishnu blessings: आषाढ़ महीने की पहली एकादशी को भगवान विष्णु चार महीने के लिए सो जाते हैं. जिस दौरान हिंदू धर्म में कोई भी मंगल काम नहीं किए जाते हैं. जैसे- विवाह, जन्म संस्कार, जनेऊ, गृह प्रवेश और मुंडन आदि. भगवान विष्णु जिस महीने में चीरनिद्रा में होते हैं, उसे चातुर्मास कहते हैं.

इस दिन से जगत के संचालन का सारा कार्य़भार भगवान विष्णु के कंधों से उतरकर शिव जी अपने सिर ले लेते हैं. सरल शब्दों में कहें तो भगवान विष्णु इन चार सालों के लिए पाताल लोक में चले जाते हैं. और सृष्टि का सारा संचालन शिव जी के हाथों में चला जाता है. चातुर्मास में मांस-मदिरा, बैंगन, गुड़, तेल, साग आदि चीजों का परहेज करना चाहिए.

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इससे भगवान विष्णु आपसे नाराज हो जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है कि जगत के पालनहार भगवान विष्णु इन चार महीनों के लिए सो जाते हैं. अगर नहीं, तो हमारे आज के इस लेख में हम आपको इसी के बारे में जानकारी देने वाले हैं, तो चलिए जानते हैं.

भगवान विष्णु चार महीनों के लिए क्यों जाते हैं चीरनिद्रा में….

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब एक बार बलि नामक राजा ने तीनों लोकों पर कब्जा कर लिया था. तब इंद्रदेव मदद के लिए भगवान विष्णु के पास पहुंचे. जिस पर भगवान विष्णु ने वामन नामक अवतार लिया. और वामन अवतार लेने के बाद भगवान विष्णु राजा बलि के पास एक भिखारी के वेश में पहुंचे.

वामन द्वादशी

और तीन पग दान में मांग लिए. और पुनं अपने वामन अवतार में वापिस आ गए. इस दौरान विष्णु जी ने दो पगों से ही धरती औऱ आसमान को नाप लिया. उसके बाद विष्णु जी ने राजा बलि से पूछा कि वे अपना तीसरा पग कहा रखें. जिस पर राजा बलि ने उनसे कहा कि वे तीसरा पग राजा बलि के सिर पर रख दें.

Guruwar ki Aarti/mantra

जिसके बाद राजा बलि का सारा अभिमान चूर-चूर हो गया, औऱ राजा बलि की दयालुता और दानी स्वभाव के चलते भगवान विष्णु ने राजा बलि को वरदान मांगने के लिए कहा. इसके बाद राजा बलि ने भगवान विष्णु को वापिस पाताल लोक लौट जाने को कहा.

Lord vishnu blessings

इस दौरान भगवान विष्णु ने राजा बलि से कहा कि वह आषाढ़ महीने की शुक्ल एकादशी से कार्तिक महीने की शुक्ल एकादशी तक पाताल लोक में ही रहेंगे. तभी से भगवान विष्णु हर साल आषाढ़ महीने की देवशयनी एकादशी से चीरनिद्रा में चले जाते हैं, और इस दौरान कोई भी धार्मिक काम नहीं होते हैं.